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सिर और गर्दन के कैंसर के लिए तंबाकू का सेवन सबसे बड़ा जोखिम कारक है। लगभग 85% सिर और गर्दन के कैंसर तंबाकू के उपयोग से जुड़े हैं। तंबाकू छोड़ने और नियमित जांच से सिर और गर्दन के कैंसर का खतरा कम हो सकता है।
सिर और गर्दन का कैंसर, कैंसर का एक समूह है जो शरीर के निम्नलिखित भागों में से किसी भी भाग में शुरू होता है :
शराब और तम्बाकू (धूम्रपान और चबाना) प्रमुख एटिऑलॉजिकल (रोग के कारण से संबंधित) कारक हैं, और उनके उपयोग से सिर और गर्दन के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
मुंह के कैंसर अक्सर जीभ, होंठ, मुंह के तल, छोटी लार ग्रंथियों और मसूड़ों पर उत्पन्न होते हैं। मुंह के कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं मुंह में लगातार छाले, गाल में गांठ या कुछ हिस्सा मोटा होना, मसूड़ों, जीभ और गालों पर सफेद और / या लाल धब्बे, असामान्य या लगातार रक्तस्राव, और मुंह में दर्द या सुन्नता।
श्वासनली, अन्ननलिका पर कैंसर की वृद्धि और गले में ग्रंथियों से पैदा होने वाले ट्यूमर को गले का कैंसर कहा जाता है। इसमें स्वरयंत्र (वॉयस बॉक्स) के साथ-साथ ग्रसनी के विभिन्न भागों, अर्थात् नासोफैरिंक्स, ऑरोफैरिंक्स और हाइपोफैरिंक्स के कैंसर भी शामिल हैं।गले के कैंसर से जुड़े सामान्य लक्षण हैं गले में लगातार गांठ या उभार, घाव जो ठीक नहीं हो रहे हो, लगातार गले में खराश, कान में दर्द और सुनने में बदलाव और सांस लेने और बात करने में कठिनाई।
साइनस और नाक की गुहा के ऊतकों में घातक (कैंसर) सेल्स (कोशिकाओं) के गठन को पैरानासल, साइनस और नाक की गुहा का कैंसर कहा जाता है।प्रमुख लक्षणों में नाक बंद होना, नाक से खून आना, आंखों में सूजन और दृष्टि का आंशिक या पूर्ण नुकसान शामिल हो सकते हैं।
लार ग्रंथियों में ट्यूमर के विकास को लार ग्रंथि का कैंसर कहा जाता है। आमतौर पर यह पैरोटिड ग्रंथि जो लार ग्रंथियों में से एक होती है और कान के ठीक सामने स्थित होती है उसमें होता है ।लार ग्रंथि के कैंसर के सामान्य लक्षण हैं कान, गाल, जबड़े, होंठ या मुंह के क्षेत्रों में दर्द रहित गांठ, कान से तरल पदार्थ का निकलना, निगलने में कठिनाई, मुंह खोलने में कठिनाई, चेहरे में सुन्नता या कमजोरी और चेहरे में दर्द।
सिर और गर्दन के कैंसर के लिए तंबाकू का सेवन सबसे बड़ा जोखिम कारक है। अनुमानित 85 प्रतिशत सिर और गर्दन के कैंसर तंबाकू के उपयोग से जुड़े हैं, और 75 प्रतिशत सिर और गर्दन के कैंसर तंबाकू और शराब दोनों के उपयोग से जुड़े हैं।
अन्य प्राथमिक जोखिम कारकों में शामिल हैं :
महिलाओं की तुलना में पुरुषों में सिर और गर्दन के कैंसर होने की संभावना अधिक होती है।
सिर और गर्दन के कैंसर आमतौर पर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखे जाते हैं।
लंबे समय तक एचपीवी या ह्युमन पेपिलोमा वायरस का संक्रमण भी सिर और गर्दन के कैंसर का कारण बन सकता है।
लंबे समय तक धूप में रहने से होंठ के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, जो मुंह के कैंसर का एक प्रकार है।
नुकीले दांतों के कारण होने वाले घाव भी मुंह के कैंसर का कारण बनते है।
अन्य जोखिम कारकों में खराब मौखिक स्वच्छता, हानिकारक रसायनों और रेडिएशन (विकिरण) के संपर्क में आना, अस्वास्थ्यकर जीवन शैली की आदतें आदि शामिल हैं।
सिर और गर्दन के कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए विभिन्न नैदानिक प्रक्रियाएं हैं :
सिर और गर्दन के कैंसर की जांच का यह भी एक तरीका है। शारीरिक परीक्षा के दौरान, डॉक्टर गर्दन, होंठ, मसूढ़ों और गालों पर गांठों की तलाश करते हैं। मुंह के अंदर लाल या सफेद धब्बे, लगातार रक्तस्राव, अल्सर जो ठीक नहीं हो रहा हो आदि की जांच की जाती है। असामान्यताओं की जांच करने के लिए नाक, मुंह, गले और जीभ का भी मुआइना किया जाता है।
यह प्रक्रिया सिर और गर्दन के कैंसर के संकेतों के लिए गले के नीचे अन्नप्रणाली तक के क्षेत्रों की जांच करने के लिए एंडोस्कोप नामक एक पतली, प्रकाश स्त्रोत वाली, लचीली ट्यूब का उपयोग करती है।
बायोप्सी में जो क्षेत्र कैंसर से प्रभावित होने का संदेह होता है उस उस क्षेत्र से ऊतक की एक छोटी मात्रा को निकालना शामिल होता है, जिसे बाद में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिती की जांच करने के लिए माइक्रोस्कोप के तहत जांचा जाता है।
विशिष्ट जीन, प्रोटीन और ट्यूमर के अन्य विशिष्ट कारकों की पहचान करने के लिए मोलेकुलर परीक्षण किए जाते हैं। इन परीक्षणों के परिणाम टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) की योजना बनाने में विशेषज्ञों की सहायता करते हैं।
जो क्षेत्र कैंसर से प्रभावित होने का संदेह होता है उस उस क्षेत्र की विस्तृत छवियों को प्राप्त करने के लिए अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी स्कैन या पेट - सीटी स्कैन जैसे इमेजिंग परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है।
सिर और गर्दन के कैंसर के लिए इष्टतम उपचार कैंसर के स्थान और उसके चरण पर निर्भर करता है। उपचार प्रोटोकॉल एक बहु - आयामी दृष्टिकोण का उपयोग करते हैं और आस-पास की नसों, ऊतकों और अंगों के कार्यों को संरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
मुख्य उपचार विकल्प सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा), कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) और इम्यूनोथेरेपी हैं।
प्रारंभिक चरणों के कैंसर (स्टेज 1 और स्टेज 2 कैंसर) का इलाज एक ही उपचार पद्धति से किया जाता है, या तो सर्जरी या रेडियोथेरेपी। जबकि, स्थानीय रूप से उन्नत चरणों के कैंसर (स्टेज 3 और स्टेज 4 कैंसर) का इलाज संयुक्त उपचार पद्धति से किया जाता है, जिसमें सर्जरी और रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी शामिल हैं।
सिर और गर्दन के कैंसर के ट्यूमर और उसके आसपास के कुछ स्वस्थ ऊतक जिनको मार्जिन कहा जाता है उनको निकालने के लिए सर्जरी की जाती है। चूंकि ये कैंसर उत्पत्ति स्थान तक ही सीमित होते हैं, इसलिए सर्जरी सबसे आम उपचार पद्धति है।ट्यूमर का निदान प्राप्त करने के लिए भी सर्जरी की जा सकती है। इसके अलावा, सर्जरी का विकल्प चुना जा सकता है :
यह गर्दन में लिम्फ नोड्स तक फैले हुए कैंसर को हटाने के लिए किया जाता है ।
जब कैंसर की सर्जरी के लिए जबड़े, त्वचा, जीभ या ग्रसनी के ऊतक की बडी मात्रा को निकालने की आवश्यकता होती है, तब रीकन्स्ट्रक्टिव (पुनर्निर्माण) सर्जरी की जाती है, जिसका उद्देश्य मरीज़ के रुप को और प्रभावित क्षेत्र के कार्यों को बहाल करना होता है। शरीर के विभिन्न अंगों जैसे बांह, जांघ या छाती से लिए गए ऊतक, सिर और गर्दन क्षेत्र से निकाले गए ऊतकों को प्रतिस्थापित करते हैं।
मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (कम से कम चिरफाड वाली सर्जरी) के माध्यम से, डॉक्टर एंडोस्कोप, लेजर और ऊर्जा उपकरणों जैसे विशेष उपकरण जो एक सर्जिकल माइक्रोस्कोप और एक रोबोट से जुड़े होते हैं, उनका उपयोग करके सिर और गर्दन के क्षेत्र में ट्यूमर का ऑपरेशन करते हैं। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (कम से कम चिरफाड वाली सर्जरी) का प्राथमिक उद्देश्य सुरक्षित और प्रभावी कैंसर सर्जरी करते हुए ऊतक विघटन और दर्द को कम करना है। इस दृष्टिकोण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कैंसर की सर्जरी के बाद बोलने, निगलने या दिखने में बहुत कम बदलाव होता है या कोई बदलाव नहीं होता है; इस उपचार के बाद रिकवरी (स्वास्थ्य लाभ) जल्दी होती है।
रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) एक उपचार पद्धति है जिसमें कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने और ट्यूमर के विकास को कम करने के लिए टार्गेट क्षेत्र में उच्च-ऊर्जा रेडिएशन (विकिरण) दिया जाता है। रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का मुख्य लाभ इस प्रक्रीया की सटीकता है, जिसके माध्यम से यह आसपास के ऊतकों को होने वाले नुकसान को कम करता है। टार्गेट (लक्ष्य) क्षेत्र में रेडिएशन (विकिरण) को दो तरीकों से पहुँचाया जाता है :
ईबीआरटी में शरीर के बाहर से उच्च-ऊर्जा के एक्स-रे या प्रोटॉन बीम को ट्यूमर के स्थान तक पहुंचाना शामिल है, जहां यह कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट कर देता है।
इस प्रकार की रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) में, रेडिएशन (विकिरण) स्रोत, जिसे इम्प्लांट या बीज के रूप में जाना जाता है, उसको कैंसर की गांठ के अंदर या उसके बगल में रखा जाता है। यह आस पास के स्वस्थ ऊतकों को प्रभावित किए बिना विशेष रूप से कैंसर के ऊतकों को रेडिएशन (विकिरण) की उच्च खुराक वितरित करने की अनुमति देता है।
सिस्टमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा) पूरे शरीर पर कार्य करती हैं और शरीर में जहां कहीं भी कैंसर की वृद्धि हो, चाहे वो कितनी भी छोटी हो जिनका पता लगाना भी मुश्किल होता है उनका भी इलाज करने में सिस्टमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा) मदद करती हैं।
तीसरी प्रमुख उपचार पद्धति है, जिसमें कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की वृद्धि और पुनरुत्पादन की क्षमता को प्रभावित करके उनको नष्ट करने के लिए प्रभावशाली दवाओं का उपयोग किया जाता है। आमतौर पर कीमोथेरेपी को रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) या सर्जरी के संयोजन में प्रशासित किया जाता है। इसका उपयोग कभी-कभी लक्षणों को कम करने के लिए भी किया जाता है।
कैंसर के इलाज का एक अनूठा प्रकार है जो ट्यूमर की बायोलॉजी पर निर्भर करता है। यह विशेष रूप से ट्यूमर माइक्रोएन्वायरमेंट को टार्गेट (लक्षित) करके या विशिष्ट प्रोटीन पर ध्यान केंद्रित करके ट्यूमर के विकास और मेटास्टेसिस को रोकना है। कैंसर के उपचार में विशिष्ट मोलेक्युलर टार्गेटिंग का लक्ष्य एक "जादू की गोली" बनाना है जो सामान्य या स्वस्थ सेल्स (कोशिकाओं) को बचाते हुए चुनिंदा रूप से कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारता है।
सिस्टमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा) का एक अन्य रूप है जो कैंसर से लड़ने के लिए शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा को उत्तेजित करता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य को सुधारने, लक्षित करने या पुनर्स्थापित करने के लिए या तो शरीर द्वारा या प्रयोगशाला में संश्लेषित कि गई सामग्री का उपयोग करता है। सिर और गर्दन के कैंसर के लिए एफडीए द्वारा स्वीकृत इम्यूनोथेरेपी का एकमात्र रूप 'इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर्स' है। इस तंत्र के एक जटिल सेट के माध्यम से, ये चेकपॉइंट इनहिबिटर्स प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को पहचानने और उन पर हमला करने के लिए संकेत देते हैं।
पूरक उपचार पारंपरिक उपचार के तौर-तरीकों के साथ उपयोग की जाने वाली चिकित्सा हैं। ये उपचार दिए गए उपचार के बाद के अस्थायी प्रभावों को कम करके, भावनात्मक तनाव को कम करके और स्वाभाविक रूप से मरीज़ों में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाकर मरीज़ों के समग्र स्वास्थ्य लाभ को बढ़ावा देते हैं।
गर्दन की सभी गांठें सिर और गर्दन के कैंसर की ओर इशारा नहीं करती हैं। ज्यादातर मामलों में, ये गांठ सूजी हुई लिम्फ नोड्स हो सकती हैं, जो संक्रमण या सूजन के कारण होती हैं। हालांकि, अगर ये गांठें लगातार बनी रहती हैं और सूजन ठीक होने के बाद भी नहीं जाती हैं, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए, जो निर्णायक निदान पर पहुंचने से पहले इन गांठों की अच्छी तरह से जांच करेंगे।
हां, अध्ययनों से पता चलता है कि दीर्घकालिक एचपीवी संक्रमण सिर और गर्दन के कैंसर का कारण बन सकता है। अस्वास्थ्यकर यौन आदतों के कारण ओरल (मौखिक) एचपीवी संक्रमण होता है। यदि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली इन असामान्य सेल्स (कोशिकाओं) को पहचानने और उनसे लड़ने में विफल रहती है, तो ओरल (मौखिक) एचपीवी संक्रमण धीरे-धीरे सिर और गर्दन के क्षेत्र में ट्यूमर बनाते हैं। एचपीवी-प्रेरित सिर और गर्दन का कैंसर महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक आम होता हैं।
हां, सिर और गर्दन के कैंसर का इलाज संभव है। हालांकि, सकारात्मक नैदानिक परिणामों और बेहतर उत्तरजीविता दर के लिए, उसका शुरुआती चरणों में पता लगाना होगा। ऐसा कहा जाता है की, अगर सही निदान किया जाए और उचित इलाज किया जाए तो यहां तक कि उन्नत चरण के सिर और गर्दन के कैंसर का इलाज भी बेहतर निदान के साथ किया जा सकता है। उपचार योजना युनिमोडल या मल्टीमोडल (एकरूप या बहुआयामी) हो सकती है।
हां, सिर और गर्दन के कैंसर के कारण कैंसर के उपचार से पहले, उपचार के दौरान और उपचार के बाद में वजन घटता है। ज्यादातर मामलों में वजन कम होने की शुरुआत भूख कम होने से होती है। सिर और गर्दन के कैंसर के मरीज़ों में वजन घटाने के अन्य कारको में शामिल हैं, मरीज़ों के चयापचय में वृद्धि, स्केलटल मांसपेशियों की हानि, अत्यधिक थकान और जीवन की गुणवत्ता में कमी।
सिर और गर्दन के कैंसर के विभिन्न उपचारों के अलग - अलग दुष्प्रभाव होते हैं। रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) से थकान, वजन कम होना और निगलने में दर्द हो सकता है। दूसरी ओर, कीमोथेरेपी से मतली, खून की कमी और स्वाद में बदलाव हो सकता है। कुछ दुष्प्रभाव जैसे की मतली उपचार समाप्त होते ही दूर हो जाते हैं। हालांकि, अन्य दुष्प्रभाव, जैसे थकान और निगलने में परेशानी उनमें सुधार होने में कुछ समय लगता है।